Chardham Yatra जो की भारतवर्ष की एक महत्वपूर्ण यात्रा होती है हिन्दू परंपरा से इस यात्रा को अत्यंत पवित्र माना गया है। चारधाम यात्रा धार्मिक दृष्टिकोण के साथ साथ आध्यात्मिक अनुभव है जो मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध कर देती है। उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय पर्वतों में स्थित चार तीर्थक्षेत्र : यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ मिलकर चारधाम यात्रा को पूर्ण करते हैं.
हिंदू मान्यताओं के अनुसार Chardham Yatra को बहुत ही पवित्र माना जाता है और इसमें उत्तराखंड की गढ़वाल पर्वत श्रृंखला में से चार पवित्र स्थान यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की गणना होती है। ८ वी शताब्दी के महान संत आदी शंकराचार्य जी ने चारधाम यात्रा की शुरुआत की थी और इसे हिन्दू धर्म मैं बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान दिया जिससे यह धार्मिक यात्रा पुरे भारतवर्ष में एकता का प्रतिक बनी। पुरानी मान्यताओं के अनुसार चारधाम यात्रा करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
चारधाम यात्रा यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ मिलकर चारधाम यात्रा होती है और यहाँ हर साल लाखो श्रद्धालु देश – विदेश से दर्शन के लिए आते है , चारधाम यात्रा एक आध्यात्मिक यात्रा है जिसे हर किसीको जीवन में एकबार जरूर करना चाहिए.
चार पवित्र स्थानों की यात्रा कैसे शुरू करें ?
चारधाम यात्रा की शुरुआत करने से पहले आपको कुछ महत्वपूर्ण बातो को ध्यान देना है जैसे की चारधाम यात्रा हर साल अप्रैल/मई महीने के अक्षय तृतीया के दिन से शुरू होकर साल के ऑक्टोबर / नवंबर तक 6 महीने के लिए चालू रहती है.
यमुनोत्री धाम –
चारधाम यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से होती है, यमुनोत्री धाम यह देवी यमुना का निवास स्थान माना जाता है और यहाँ से ही यमुना नदी का प्रमुख स्त्रोत माना जाता है। यमुनोत्री धाम तक पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिल्हे में जानकी चट्टी तक पहुंचना होगा।
जानकी चट्टी से यमुनोत्री धाम तक पहुंचने के लिए आपको ६ की मि का कठिन ट्रेक्क ( पैदल ) करना होगा। यहाँ की प्राकृर्तिक सौंदर्य जैसे की बर्फ से ढके पहाड़, घने जंगल और गर्म पानी के कुंड आपको बहुत ही रोमांचक और एक अलग ही अनुभव देते है.
गंगोत्री धाम –
गंगोत्री धाम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिल्हे में स्थित है और चारधाम में से दूसरा महत्वपूर्ण धाम है, गंगोत्री धाम सबसे पवित्र गंगा नदी का स्त्रोत माना जाता है जो की आगे जाके भागीरथी नदी का स्त्रोत बनती है। आपको गौमुख ग्लेशियर जो गंगोत्री से १८ की मी की दुरी पर स्थित है जहा से गंगा वास्तव में निकलती है यहाँ पहुंचने के लिए आपको कठीन ट्रेक्क करके जाना पडता है.
केदारनाथ धाम –
केदारनाथ धाम जो भगवन शिव के १२ ज्योतिर्लिंग में से एक महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग और चारधाम में से तीसरा धाम है जो उत्तराखंड की रुद्रप्रयाग जिल्हे में स्थित है. केदारनाथ मंदिर समुद्र तल से लगभग ११७५५ ft. ऊंचाई पर होने के कारन यहा तक पहुंचना बहुत हि कठिन होता है पर आध्यात्मिक रूप से गहरा पडाव होने के कारन यहाँ हर साल लाखो श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचाते है.
आप केदारनाथ मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग १८-२० की. मी. का ट्रैकिंग करना होता है या फिर आप डोली या खच्चर से भी जा सकते है, केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए आनेवाली श्रद्धालु की संख्या को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने हेलीकॉप्टर की सुविधा की है लेकिन इसके लिए आपको पहले से ही हेलीकॉप्टर बुकिंग करनी होती है.
बद्रीनाथ धाम –
उत्तराखंड के चारधाम में से बद्रीनाथ धाम जो भगवन विष्णु के पवित्र धाम के रूप में माना जाता है, बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिल्हे में स्थित नर और नारायण पर्वत के बीच अलकनंदा नदी के किनारे पर है, मंदिर के पास तप्त कुण्ड और माना गाव (भारत का प्रथम गाव ) इस यात्रा को और भी विशेष बना देता है.
बद्रीनाथ धाम ना केवल तीर्थस्थान है बल्कि भक्ति, दर्शन और मोक्ष की राह पर अंतिम पड़ाव भी है, इसलिए बद्रीनाथ धाम को ” मोक्षधाम ” भी कहा गया है.







